Wednesday, 30 June 2010

JaiGuruDev Samachar, Sandesh - Mathura

30 -06 -2010

आज प्रातः बाबा जयगुरूदेव जी महाराज अमरावती में सत्संग व नामदान दिया। अपने संदेश में गुरू महाराज ने कहा कि मनुश्य शरीर आपको मिला है भजन करके जीवात्मा को जगाने के लिए और आपने इसे संसार के कामों में लगा दिया। आपको चाहिए कि जगे हुऐ महापुरूषों की खोज करो और उनसे रास्ता लेकर भजन करके अपनी जीवात्मा को जगाकर अपने घर पहंुचा दो।
सत्संग और नामदान देने के बाद अचलपुर जिला अमरावती की ओर चले गऐ हैं। आज का रात्रि पड़ाव वहीं होने की सूचना है। कल प्रातः गुरू महाराज वहां सत्संग व नामदान की मौज कर सकते हैं।
बीते हुऐ दिन
नई दिल्ली में बाबा जयगुरूदेव जी महाराज ने राष्ट्र के नाम भेजे गऐ एक संदेश में 7 नवम्बर 1973 को कहा कि आध्यात्मिक क्रान्ति की जड़ें जो सन् 70, 71 और 72 में अन्दर ही अन्दर बिना किसी लोक यश के जमती रही और फैलती रहीं अब उनमें शाखें फूटने लगी हैं। सन् 72 तक देश में 20 करोड़ नर-नारियों का जनजागरण हो चुका है। सन् 73 में 15 फरवरी से 9 अक्टूबर तक 5 करोड़ 33 लाख नर नारियों को बैठाकर संदेश परमात्मा का, सुख और शान्ति का, धर्म और कर्म का मैंने सुनाया। शराब, मांस, मछलीयों को छुड़ाया, जुआ, चोरी, कत्लों को छुड़ाया, रिश्वत और अन्याय से दूर किया।
देसा देश भक्ति का संदेश अखबार और रेडियों पर नहीं आया। पत्रकार अपनी-अपनी रिपोर्ट जगह-जगह के पत्रों को देते रहे हैं। प्रधानमंत्री ने अखबारों को मना कर दिया था कि बाबा जयगुरूदेव का समाचार तथा उनके सत्संग के भीड़ का हवाला अगर आपने निकाला तो आपका कोटा बन्द कर दिया जाऐगा। पत्रकारों ने मुझसे इस बात को बताया और कहा कि जब हम इनके बन्धन से मुक्त हो जाऐंगे तो हम इनकी सारी कलई खोल देंगे।
बाबा जी ने बताया कि इस आध्यात्मिक और वैचारिक क्रांति के द्वारा जिस प्रकार मैंने देश में खूनी क्रांति को रोक दिया और अब इनके ही द्वारा हर तरह के परिवर्तन होने जा रहे हैं। यह परिवर्तन केवल भारत का न होकर पूरे विश्व में होगा। भारत सभी राष्ट्रों का अगुआ बनेगा और विश्व के देशों में सबसे बड़ा राष्ट्र होगा। भारत के आस-पास के देश टूटकर भारत में मिल जाऐंगे। भारत में बना हुआ विधान सभी देशों में लागू किया जाऐगा और सभी देश इसको सहर्ष स्वीकार करेंगे। सुरक्षा परिषद और विश्व की न्यायपालिका भारत में चली आऐगी। सब देशों के लोग अपना न्याय कराने के लिए भारत में आऐंगे। भारत की आध्यात्मिकता को प्राप्त करने के लिए अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, व अन्य सभी देशों के लोग हिन्दुओं के खान-पान और पहनावे को अपना लेंगे और हिन्दू धर्म को स्वीकार करेंगे। सारा विश्व शाकाहारी हो जाऐगा। ये सारे परिवर्तन होकर रहेंगे। कोई माई का लाल इसे अब रोक नहीं सकता है। लेकिन इसके पहले तुम्हें बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। इन तकलीफों को तुम बर्दाश्त करके पार कर जाओ फिर तुम्हें बहुत बड़ा सुख मिलेगा जिसका तुम अभी अनुमान भी नहीं कर सकते हो।
आगे भारत और विश्व के मुल्कों में सूखा पड़ेगा। कुऐं, तालाब सब सूख जाऐंगे और कहीं कहीं जमीन के अन्दर का जल श्रोत भी सूचा जाऐगा। अन्न नहीं मिलेगा। चारों तरफ हाहाकार मच जाऐगा, करोड़ों लोग मर जाऐंगे। ऐसे महा भयंकर समय में तुम तीन मिनट में भगवान को यदि याद न करने लगो तो मुझे बाबा जी मत कहना।
ऋषियों-मुनियों की इस पावन तपोभूमि हरिद्वार से देश और दुनियां के सुधार के लिए आवतरित शक्तियां अब मैदान में उतरेंगी और कार्य शुरू करेंगी। इनका कार्य कैसा होगा, इनका न्याय कितना निष्पक्ष और ऊँचा होगा, जनता की भलाई के लिए ये कितने संलग्न होंगे यह तो आपको समय ही बतायेगा। एक बात जरूर है कि न्याय की कसौटी पर ये बच्चे इतने खरे होंगे कि अपने सगे-संबंधियों को भी माफ नहीं करेंगे। त्याग की कसौटी पर ये इतने सच्चे उतरेंगे कि जनहित में इन्हें अपना तन-मन, धन सब कुछ लगाना पड़ा तो उसके लिए भी ये तैयार रहेंगे। जनमत की ये बच्चे इतनी संभाल करेंगे कि जनता को इनके कार्यों में जरा सा भी असंतोष हुआ अथवा ये जनता से किऐ गऐ अपने वादों को पूरा करने में असफल रहे तो वे अपनी गद्दी छोड़ देंगे। अब ऐसे बच्चे हरिद्वार में हकरारनामा भरेंगे और अब कार्य क्षेत्र में उतरेंगे।
जितने भी रावण हैं देश और दुनियां में अब उनका खात्मा निश्चित है। वो बच नहीं सकते हैं। रावण किसे कहते हैं ? जो अंग्रेजी पढ़ा, हिन्दी पढ़ा तथा सब विद्याओं का ज्ञाता होता हुआ भी सच्ची बातों को न माने, अपने झूठे अहंकार में, मान-बड़ाई के लिए हर तरह के नैतिक-अनैतिक कार्यों को करने में न हिचके ऐसे रावण अब मरेंगे। ़त्रेता का रावण भी बहुत बड़ा विद्वान था, उसके राज्य में बहुत बड़ा वैभव था, सोने की लंका फिर भी उसका नैतिक पतन इतना नहीं हुआ था जितना कि आज लोगों का हो गया। ऐसे रावण चाहे जहां हों मथुरा में ही क्यों न हों अवश्य मरेंगे और जहां-जहां जब-जब रावण मरेगा दुनियां उसको देखेगी।
भक्तों की रक्षा सदा होती आई है और अब भी होगी। यदि लंका में विभषण की कुटिया बच सकती थी तो अब भी ईश्वर को मानने वालों और धर्म पर चलने वालों की रक्षा ऐसे भीषण समय में की जाऐगी। प्रेमियों! तुम्हें चिन्ता करने की कोई बात नहीं है। भयंकर समय के कष्टों में परमात्मा का और महात्माओं का हाथ तुम्हारे सिर पर होगा। तुम भजन सुमिरन में लगे रहना, अपने पथ से विचलित मत होना। वह परम पिता अन्तर्यामी है। तुम्हारी जरूरतों को समझता है, उसी के अनुसार तुम्हारी रक्षा करता है। तुम भूख बर्दाश्त कर लेना लेकिन कभी उससे रोटी मत मांगना। उससे हमेशा उसकी दया और तकलीफों को बर्दाश्त करने की शक्ति मांगना। उससे हमेशा उसकी दया और तकलीफों को बर्दाश्त करने की शक्ति मांगना। वैसे वह स्वयं ही बहुत दयालु है। जबकि दुनियां अपने ही कर्मानुसार आऐ हुऐ अकाल और कष्टों से पीड़ित होगी उस समय अगर तुम्हें एक रोटी भी मिल जाऐगी तो यह उस परमात्मा की कितनी बड़ी कृपा तुम्हारे ऊपर होगी। इसलिए तम्हें चिन्ता करने की कोई बात नहीं है। जब जैसा समय आऐगा उसके अनुसार तुमसे सब कुछ बर्दाश्त करा लिया जाऐगा।
सब लोग संभल जाऐं। सचेत हो जाऐं। अब कार्य तेजी से होने जा रहा है। बदलते हुऐ समय के साथ कुछ भी बदल जाऐ। यह तुम्हारी बुद्धिमानी होगी। समय तो बदल कर रहेगा ही, बुराइयां समाप्त होकर रहेंगी, धर्म और कर्म रीति और सदाचार, महात्माओं और गुरूओं के प्रति आस्था यह आकर के ही रहेगा। अब यह रूक नहीं सकता है। तुम अगर इस बदलते जमाने के साथ बदल जाओगे तो अपना कल्याण करोगे और नहीं तो युगों-युगों तक तुम्हें केवल पछताना ही रहेगा।
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